मध्य प्रदेश सरकार के किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग (FW&AD) ने उर्वरक (खाद) वितरण व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए ‘ई-विकास प्रणाली’ (e-Vikas System) की शुरुआत की है। इस पोर्टल के माध्यम से अब राज्य के किसानों को खाद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और वितरण प्रक्रिया में होने वाली धांधली पर लगाम लगेगी।

वर्तमान चुनौती: आखिर क्यों पड़ी इस पोर्टल की जरूरत?
वर्तमान में खाद वितरण में मार्कफेड, एमपी एग्रो, पैक्स (PACS) और निजी विक्रेता शामिल हैं। इसके बावजूद किसानों को कुछ मुख्य समस्याओं का सामना करना पड़ता था:
- असमान वितरण: कहीं खाद ज्यादा पहुँच जाती थी, तो कहीं बिल्कुल नहीं।
- निगरानी की कमी: खाद कब और कहाँ पहुँची, इसका रियल-टाइम डेटा उपलब्ध नहीं था।
- समय पर उपलब्धता न होना: बुआई के समय खाद की किल्लत से फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता था।
ई-विकास प्रणाली (e-Vikas) कैसे काम करेगी?
ई-विकास पोर्टल केवल एक वेबसाइट नहीं है, बल्कि यह खाद वितरण को स्मार्ट बनाने का एक जरिया है। इसकी कार्यप्रणाली इन आधारों पर टिकी है:
- भूमि अभिलेखों का एकीकरण: किसान की कितनी जमीन है, इसकी जानकारी सीधे पोर्टल से जुड़ी होगी।
- फसल पैटर्न आधारित वितरण: किसान ने कौन सी फसल बोई है और मौसम कैसा है, इसके आधार पर ही खाद की मात्रा तय की जाएगी।
- वास्तविक आवश्यकता का आकलन: अब अंदाजे से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक आधार पर तय होगा कि किस जिले या क्षेत्र में कितनी खाद भेजनी है।
पोर्टल के मुख्य लाभ (Key Benefits)
इस नई व्यवस्था से किसानों और विभाग दोनों को बड़े फायदे होंगे:
- पारदर्शिता और जवाबदेही: खाद की हर बोरी का हिसाब डिजिटल होगा, जिससे कालाबाजारी रुकेगी।
- समय की बचत: किसानों को अब लंबी लाइनों में लगने की जरूरत कम होगी क्योंकि आपूर्ति मांग के अनुसार होगी।
- समान वितरण: छोटे और बड़े, सभी किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार समान रूप से उर्वरक मिलेगा।
- उत्पादन में वृद्धि: सही समय पर खाद मिलने से कृषि पैदावार बेहतर होगी।
महत्वपूर्ण लिंक और जानकारी
- आधिकारिक पोर्टल: https://evikas.mpkrishi.mp.gov.in/
- विभाग: किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, मध्य प्रदेश।